स्मृतियाँ
कुछ स्मृतियाँ यूँ ही नहीं जा पाती है,
‘अतीत के गर्त’ से यूँ बाहर निकल आती है !…
Neha Trikoti’s posts, poems and shayari
कुछ स्मृतियाँ यूँ ही नहीं जा पाती है,
‘अतीत के गर्त’ से यूँ बाहर निकल आती है !…
चंचल और व्याकुलता से भरे
उसके नयन…….
ठहरो जरा रुक जाओ,
कहाँ जाने की बात करते हो…..
जहाँ सूर्य की पहली किरण, गर्माहट दे जाती है…
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